अंक 140मनोविज्ञान4 मिनटपठन 82
प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट
ज़ुबान की नोक पर अटका नाम—क्या याद मिट गई है?
याद बनी रहती है, बस शब्द की ध्वनि तक पहुँचने का रास्ता कुछ देर के लिए अटक जाता है। अक्सर पहले अक्षर या अक्षरों की संख्या का अंदाज़ा रहता है।
कभी ऐसा होता है कि किसी जाने-पहचाने अभिनेता का नाम ज़ुबान पर घूमता रहता है, लेकिन निकलता ही नहीं। शब्द का इस तरह ज़ुबान की नोक पर अटकना याद मिट जाने का मामला नहीं है। उसका अर्थ तो याद आ गया है, लेकिन उस शब्द की ध्वनि तक पहुँचने का रास्ता कुछ देर के लिए अटक गया है। इसीलिए साथ में यह एहसास भी होता है कि शायद उसका पहला अक्षर या उसमें अक्षरों की संख्या पता है।
अर्थ पता है, बस ध्वनि अटकी है
माना जाता है कि मन से कोई शब्द निकालते समय हम दो चरणों से गुज़रते हैं। पहले हम अर्थ ढूँढ़ते हैं, जैसे 「उस फ़िल्म में आया वह व्यक्ति」, और फिर उस अर्थ से जुड़ी ध्वनि खोजकर उसे मुँह तक पहुँचाते हैं। ज़ुबान की नोक पर शब्द अटकने की स्थिति में पहला चरण पूरा हो चुका होता है, लेकिन दूसरे चरण में अड़चन आ जाती है।
1966 में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ब्राउन और मैकनील ने लोगों को शब्दों की परिभाषाएँ पढ़कर सुनाईं और जिन लोगों ने कहा कि जवाब ज़ुबान की नोक पर है, उनसे जो भी सूझ रहा था, उसे लिखने को कहा। पूरा शब्द याद न आने पर भी उन्होंने काफ़ी अधिक मामलों में पहला अक्षर और शब्दांशों की संख्या सही बताई। कभी-कभी उसकी जगह मिलता-जुलता सुनाई देने वाला कोई बेमेल शब्द भी याद आया। इसका मतलब है कि ध्वनि की जानकारी टुकड़ों में बनी रहती है।
सिर्फ़ उम्र की वजह से नहीं होता
ज़ुबान की नोक पर शब्द अटक जाए तो यह चिंता होना आसान है कि कहीं यह याददाश्त कमज़ोर होने का संकेत तो नहीं। लेकिन युवा भी अक्सर इसका अनुभव करते हैं। 1991 में बर्क की शोध टीम ने युवा और बुज़ुर्ग वयस्कों से 4 सप्ताह तक डायरी लिखवाई। दोनों समूहों को कई बार यह अनुभव हुआ, और उम्र बढ़ने के साथ यह कुछ अधिक बार हुआ। ख़ास तौर पर व्यक्तियों के नाम जैसी व्यक्तिवाचक संज्ञाओं में यह सबसे ज़्यादा हुआ।
व्यक्तिवाचक संज्ञाओं के अधिक अटकने की व्याख्या यह है कि उनमें अर्थ और ध्वनि को जोड़ने वाला रास्ता सिर्फ़ एक होता है। कोरियाई में 「의자」 यानी कुर्सी की जगह 「걸상」 यानी बैठने की चौकी भी कहा जा सकता है, लेकिन किसी अभिनेता के नाम की उस ध्वनि के अलावा कोई और शब्द उसका स्थान नहीं ले सकता। किसी शब्द का लंबे समय से इस्तेमाल न किया हो, तब भी उसके अटकने की संभावना अधिक होती है।
शब्द अटके तो क्या आज़मा सकते हैं
सबसे आम नतीजा यह होता है कि थोड़ी देर बाद शब्द अपने आप याद आ जाता है। डायरी वाले अध्ययन में भी ज़्यादातर मामलों में आख़िरकार शब्द याद आ गया, और अक्सर कोई दूसरा काम करते हुए अचानक याद आया। ज़बरदस्ती उसी पर अड़े रहने से मन में घूमता कोई बेमेल शब्द उलटे रास्ता रोक सकता है।
इसलिए थोड़ी देर किसी दूसरे काम में लग जाना या कोरियाई वर्णमाला के क्रम में एक-एक शुरुआती ध्वनि आज़माना ठीक रहता है। जवाब मिल जाने के बाद उस शब्द को एक-दो बार ज़ोर से बोल लेना भी मददगार हो सकता है। शोध में पाया गया है कि एक ही शब्द के ज़ुबान की नोक पर बार-बार अटकने की प्रवृत्ति होती है, इसलिए ऐसा करना उस अटके हुए रास्ते को एक बार फिर मज़बूत करने जैसा है।
संबंधित लेख
ज़ुबान की नोक पर अटका शब्द मिटा नहीं है, बस उसकी ध्वनि तक पहुँचने का रास्ता कुछ देर के लिए अटक गया है। कुछ देर उसे छोड़ दें तो आम तौर पर वह अपने आप याद आ जाता है।
टिप्पणियाँ और संदर्भ · Brown & McNeill(1966), बर्क और अन्य(1991) का ज़ुबान की नोक पर शब्द अटकने की घटना पर शोध. परिभाषाओं वाले प्रयोग और 4 सप्ताह के डायरी अध्ययन में पहला अक्षर और शब्दांशों की संख्या सही बताने की प्रवृत्ति तथा व्यक्तिवाचक संज्ञाओं में यह घटना अधिक होने की बात सामने आई। इसके कारणों को समझाने के लिए कई परिकल्पनाएँ मौजूद हैं।
लेखन मानदंडत्रुटि की सूचना दें
छोटी प्रश्नोत्तरी