अंक 84स्वास्थ्य3 मिनटपठन 91
प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट
उँगलियाँ चटकाने पर आने वाली चटाक की आवाज़ क्या हड्डियों से आती है?
राहत का एहसास देने वाली यह आवाज़ असल में हड्डियों के आपस में टकराने से नहीं आती।
उँगलियाँ चटकाते समय आने वाली चटाक की आवाज़ हड्डियों के टकराने की आवाज़ नहीं है। यह जोड़ के भीतर भरे गाढ़े तरल में अचानक एक छोटी खाली जगह, यानी बुलबुले जैसा खाली स्थान बनने की प्रक्रिया में आती है।
जोड़ के भीतर तरल में खाली जगह बनती है
उँगलियों के जोड़ों में दो हड्डियों के सिरे एक थैली जैसी झिल्ली में घिरे होते हैं और उसके भीतर चिकनाई देने वाला संधि द्रव भरा होता है। उँगली खींचने या पीछे की ओर मोड़ने पर शुरू में हड्डियों के सिरे आपस में सटे रहकर खिंचाव का प्रतिरोध करते हैं। फिर एक क्षण में वे अचानक अलग हो जाते हैं और भीतर का दबाव तेजी से गिरने पर तरल में घुली गैस बाहर निकलकर एक खाली जगह बना देती है।
2015 में कनाडा के अल्बर्टा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक पुरुष की उँगलियों के 10 जोड़ों को खींचते हुए MRI से उसी समय की तस्वीरें लीं। सभी 10 जोड़ों में आवाज़ आने के क्षण जोड़ के भीतर एक अँधेरी खाली जगह दिखाई दी और आवाज़ आने के बाद भी वह बनी रही।
आवाज़ की असल वजह पर बहस अभी जारी है
तो क्या आवाज़ खाली जगह बनने पर आती है या उसके ढहने पर? 1971 में ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने माना कि आवाज़ बुलबुले के ढहने से आती है, जबकि 2015 के MRI अध्ययन ने खाली जगह बनने के क्षण को अधिक महत्व दिया। 2018 में एक गणितीय मॉडल सामने आया, जिसके मुताबिक बुलबुले के केवल कुछ हिस्से के ढहने पर भी वास्तविक आवाज़ जैसी तीव्रता और तारत्व वाली आवाज़ पैदा होती है, इसलिए बहस अब भी जारी है।
एक बार चटक चुके जोड़ को तुरंत दोबारा चटकाने की कोशिश करें तो आम तौर पर आवाज़ नहीं आती। 1947 के एक प्रयोग में लगभग 20 मिनट बीतने के बाद ही दोबारा आवाज़ आई थी।
क्या उँगलियाँ चटकाने से गठिया होता है?
यह बात भी अक्सर सुनने को मिलती है कि बार-बार उँगलियाँ चटकाने से गठिया हो जाता है। एक डॉक्टर ने 60 वर्षों तक केवल बाएँ हाथ की उँगलियाँ चटकाईं और दाएँ हाथ को वैसे ही रहने दिया। उन्होंने दर्ज किया कि दोनों में से किसी भी हाथ में गठिया नहीं हुआ। केवल एक व्यक्ति का अनुभव होने के कारण यह मजबूत प्रमाण नहीं है, लेकिन एक बड़े अध्ययन में भी ऐसा ही नतीजा मिला।
2011 में अमेरिका में 50 से 89 वर्ष की उम्र के 215 लोगों पर हुए अध्ययन में आदतन उँगलियाँ चटकाने वाले और ऐसा न करने वाले लोगों में हाथ के गठिया की दर क्रमशः 18.1% और 21.5% थी, जिनमें कोई स्पष्ट अंतर नहीं था। कितने वर्षों से और कितनी बार उँगलियाँ चटकाई गई थीं, इसे ध्यान में रखने पर भी नतीजा ऐसा ही रहा।
इन स्थितियों में ध्यान दें
गठिया की चिंता कम कर सकते हैं, लेकिन राहत पाने के लिए आवाज़ आना जरूरी नहीं है। अगर केवल अकड़न दूर करनी हो तो धीरे-धीरे मुट्ठी बंद करके खोलना या कलाई घुमाना भी पर्याप्त है।
जिस चीज़ पर ध्यान देना चाहिए, वह है दर्द। चटकाते समय दर्द हो या जोड़ सूज जाए, या चोट लगने के बाद से आवाज़ आनी शुरू हुई हो, तो यह केवल बुलबुले की आवाज़ नहीं भी हो सकती है, इसलिए डॉक्टर को दिखाएँ।
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उँगलियाँ चटकाने की आवाज़ हड्डियों से नहीं, बल्कि संधि द्रव में अचानक खाली जगह बनने की प्रक्रिया से आती है।
टिप्पणियाँ और संदर्भ · कावचक और सहलेखक, PLOS ONE 2015 · डीवेबर और सहलेखक, JABFM 2011. MRI अध्ययन (एक व्यक्ति की उँगलियों के 10 जोड़) और Scientific Reports में 2018 में प्रकाशित गणितीय मॉडल आवाज़ की वजह को अलग-अलग तरह से देखते हैं। गठिया से जुड़ी जानकारी के लिए उंगर (1998) के व्यक्तिगत रिकॉर्ड और 215 लोगों के केस-कंट्रोल अध्ययन का आधार लिया गया है।
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