अंक 231स्वास्थ्य3 मिनटपठन 91
प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट
आसमान देखते समय तैरते बिंदु और धागे आँख के अंदर की परछाईं हैं
आँख के जेली जैसे पदार्थ के रेशे रेटिना पर परछाईं डालते हैं
साफ़ आसमान या सफ़ेद दीवार देखते समय आँखों के सामने बिंदु या धागे जैसी चीज़ें तैरती दिखें, तो इसे फ्लोटर्स (मस्का वोलिटेंटेस) कहते हैं। ये आँख के बाहर की धूल नहीं हैं, बल्कि आँख के अंदर विट्रियस नाम के जेली जैसे पदार्थ के रेशों की परछाईं हैं, जो रेटिना पर पड़ती है।
आँख की जेली में रेशे होते हैं
आँख के अंदर विट्रियस नाम का साफ़, जेली जैसा पदार्थ भरा होता है। अमेरिका के नेशनल आई इंस्टीट्यूट (NEI) की पुरानी जानकारी के अनुसार विट्रियस आँख का लगभग 80% हिस्सा भरता है और आँख को गोल आकार में रखने में मदद करता है। यह ज़्यादातर पानी है, जिसमें कोलेजन नाम के प्रोटीन के रेशे मिले होते हैं।
उम्र बढ़ने पर विट्रियस धीरे-धीरे पतला होकर सिकुड़ता है और रेशे आपस में उलझकर पतले धागों या गुच्छों में बदल जाते हैं। जब ये टुकड़े थोड़ी रोशनी रोकते हैं, तो आँख के पीछे की रेटिना (रोशनी ग्रहण करने वाली पतली परत) पर छोटी परछाइयाँ बनती हैं, और हम उन्हें तैरते बिंदु या पतली रेखाओं के रूप में देखते हैं। परछाईं आँख के अंदर ही बनती है, इसलिए पलक झपकाने या आँख की सतह पोंछने से भी ये नहीं जातीं।
सीधे देखने पर ये भाग जाती हैं
मेयो क्लिनिक के अनुसार फ्लोटर्स काले या स्लेटी बिंदु, डोरी या मकड़ी के जाले जैसे दिखते हैं। चमकदार सफ़ेद पृष्ठभूमि पर ये ख़ास तौर पर आसानी से दिखते हैं। जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार सफ़ेद चीज़ देखते समय ये सबसे साफ़ दिखते हैं। इसीलिए साफ़ आसमान या सफ़ेद मॉनिटर स्क्रीन देखते समय ये ध्यान में आते हैं।
सीधे देखने के लिए आँख घुमाएँ तो परछाईं झट से भागती-सी लगती है। NEI के अनुसार ये परछाइयाँ आँख की हरकत का ठीक-ठीक पीछा नहीं करतीं और आँख रुकने पर धीरे-धीरे तैरती हैं। ये जेली में तैरते टुकड़े हैं, इसलिए आँख के हिलते ही तुरंत साथ नहीं आतीं।
ज़्यादातर हानिरहित, पर अचानक बढ़ें तो
फ्लोटर्स ज़्यादातर उम्र के साथ होने वाला स्वाभाविक बदलाव हैं। NEI के अनुसार विट्रियस डिटैचमेंट, यानी विट्रियस का रेटिना से अलग होना, आमतौर पर 50 साल की उम्र के बाद होता है। NEI के अनुसार ज़्यादातर मामलों में यह नज़र के लिए ख़तरा नहीं होता और इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती। कोई गंभीर समस्या न हो तो कुछ महीनों बाद अक्सर इन पर कम ध्यान जाता है।
लेकिन अगर बिंदु अचानक एक साथ बढ़ जाएँ, रोशनी की चमक दिखे, या नज़र के एक हिस्से पर परदे जैसी परछाईं आ जाए, तो हो सकता है रेटिना फट गई हो या अलग हो गई हो। NEI ऐसे लक्षण होने पर तुरंत आँखों के डॉक्टर या इमरजेंसी में जाने की सलाह देता है।
आसमान में दिखने वाले बिंदु और धागे आँख के अंदर के रेशों की परछाईं हैं। अचानक बढ़ें तो तुरंत आँखों के डॉक्टर के पास जाएँ।
टिप्पणियाँ और संदर्भ · नेशनल आई इंस्टीट्यूट (NEI), मेयो क्लिनिक. फ्लोटर्स और विट्रियस डिटैचमेंट पर NEI की जानकारी, मेयो क्लिनिक और जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन की व्याख्या पर आधारित। विट्रियस के आँख का लगभग 80% होने का आँकड़ा NEI की पुरानी जानकारी से है।
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