अंक 25स्वास्थ्य3 मिनटपठन 106
प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट
पानी में देर तक डूबी उँगलियों पर झुर्रियाँ क्यों पड़ती हैं
नहाने के बाद उँगलियों के सिरे सिकुड़ जाते हैं, लेकिन जिन उँगलियों की नसों को चोट लगी हो, उनमें ऐसा कम होता है।
देर तक नहाने या बर्तन धोने पर उँगलियों के सिरे सिकुड़ जाते हैं। इन झुर्रियों को केवल पानी सोखकर त्वचा के फूलने से नहीं समझाया जा सकता। यह नसों से मिलने वाले संकेतों के कारण त्वचा के नीचे की रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने से होने वाली प्रतिक्रिया है।
सिर्फ पानी सोखने से ऐसा नहीं होता
लंबे समय तक लोगों का मानना था कि बाहरी त्वचा पानी सोखकर फूल जाती है और उस पर झुर्रियाँ पड़ जाती हैं। लेकिन 1935 में ब्रिटेन के डॉक्टरों ने उँगलियों की नसों में चोट वाले मरीज़ों को देखा, तो पाया कि उन उँगलियों को पानी में डुबोने पर भी झुर्रियाँ आसानी से नहीं पड़ती थीं।
अब इसे इस तरह समझाया जाता है। उँगलियों के सिरे कुछ मिनट पानी में डूबे रहें, तो स्वायत्त तंत्रिका तंत्र संकेत भेजकर त्वचा के नीचे की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ता है। अंदर का आयतन थोड़ा घटने के कारण ऊपर की त्वचा मुड़कर खाँचों का रूप ले लेती है। अस्पतालों में इस विशेषता का इस्तेमाल कभी-कभी यह जाँचने के लिए भी किया जाता है कि उँगलियों की नसें काम कर रही हैं या नहीं।
क्या इससे पकड़ने में मदद मिलती है?
तो फिर शरीर झुर्रियाँ बनाता ही क्यों है? 2011 में यह परिकल्पना सामने आई कि ये झुर्रियाँ टायर के खाँचों की तरह पानी निकाल देती हैं। ब्रिटेन में 2013 में हुए एक प्रयोग में झुर्रियों वाले हाथों से पानी में भीगे कंचे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाले लोगों ने काम जल्दी पूरा किया।
लेकिन 2014 में जर्मनी के शोधकर्ताओं ने पाया कि झुर्रियाँ होने पर भी गीली चीज़ों को सँभालने में खास अंतर नहीं पड़ा। इसलिए यह कहना अधिक सही है कि ‘इनसे पकड़ने में मदद मिलती है’ एक संभावित परिकल्पना है, कोई निश्चित उत्तर नहीं।
उँगलियों के सिरों पर ही क्यों पड़ती हैं?
उँगलियों के सिरों, पैरों की उँगलियों, हथेलियों और तलवों पर ही झुर्रियाँ आसानी से पड़ने की भी वजह है। इन जगहों की त्वचा मोटी होती है, बाल नहीं होते और रक्त वाहिकाओं की चौड़ाई नियंत्रित करने वाली नसें खास तौर पर बड़ी संख्या में मौजूद होती हैं।
बाँहें या पेट देर तक पानी में रहने पर भी नहीं सिकुड़ते। इससे इस व्याख्या को बल मिला कि ये झुर्रियाँ संयोग से त्वचा के फूलने का नतीजा होने के बजाय शरीर की ऐसी प्रतिक्रिया हैं, जो चीज़ों को पकड़ने और उन पर पैर रखने वाले हिस्सों में ही होती है।
पानी से निकलने पर त्वचा फिर समतल हो जाती है
पानी से निकलकर हाथ सुखाने पर झुर्रियाँ समय के साथ धीरे-धीरे गायब हो जाती हैं। यह थोड़ी देर की प्रतिक्रिया है, इसलिए चिंता की बात नहीं है। आम तौर पर गर्म पानी में ये जल्दी पड़ती हैं और हर व्यक्ति में इनके पड़ने की गति और मात्रा भी अलग होती है।
लेकिन हाथों को देर तक डिटर्जेंट या बहुत गर्म पानी में डुबोए रखने से त्वचा का तेल धुल सकता है और वह रूखी हो सकती है। बर्तन धोते समय रबर के दस्ताने पहनना और काम खत्म होने पर हाथ पोंछकर मॉइस्चराइज़र लगाना अच्छा रहता है।
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पानी में भीगी उँगलियों की झुर्रियाँ नसों के संकेतों से होने वाली थोड़ी देर की प्रतिक्रिया हैं। ये क्यों पड़ती हैं, इस पर अभी शोध जारी है।
टिप्पणियाँ और संदर्भ · Kareklas और अन्य 2013 · Haseleu और अन्य 2014. 2013 के प्रयोग में झुर्रियों वाले हाथों से गीली चीज़ें जल्दी एक जगह से दूसरी जगह ले जाई गईं, जबकि 2014 के प्रयोग में कोई अंतर नहीं मिला। नसों को चोट लगने पर झुर्रियाँ कम पड़ने का अवलोकन 1935 से किया जाता रहा है।
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