अंक 118विज्ञान4 मिनटपठन 89
प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट
हवाई जहाज़ के पीछे की सफ़ेद लकीर धुआँ है या बादल?
किसी दिन झट से गायब हो जाने वाली और किसी दिन आसमान में दूर तक देर तक बनी रहने वाली सफ़ेद लकीर आखिर किस चीज़ से बनती है?
हवाई जहाज़ के पीछे बनने वाली सफ़ेद लकीर धुआँ नहीं, बल्कि बर्फ़ के कणों से बना एक पतला बादल है। इसे विमान की संघनन रेखा या कॉन्ट्रेल कहते हैं। इंजन से निकली जलवाष्प बहुत ठंडे आसमान में पल भर में जम जाती है, जिससे यह बनती है।
इंजन से निकलने वाली जलवाष्प
हवाई जहाज़ का ईंधन जलता है तो गर्मी के साथ पानी भी जलवाष्प के रूप में बनता है। यात्री विमान ज़मीन से लगभग 10 किलोमीटर की ऊँचाई पर उड़ते हैं, जहाँ हवा का तापमान अक्सर शून्य से 40 डिग्री नीचे से भी कम होता है। जब इंजन से निकली गर्म और नम गैसें इस ठंडी हवा से मिलती हैं, तो जलवाष्प इंजन से निकले छोटे कणों पर चिपककर पानी की बूँदें बनाती है। ये तुरंत जमकर बर्फ़ के कण बन जाती हैं।
यह सर्दियों में साँस छोड़ने पर उसके सफ़ेद दिखाई देने जैसी ही प्रक्रिया है, बस आसमान में बहुत ऊँचाई पर कहीं बड़े पैमाने पर होती है।
किसी दिन झट से गायब, किसी दिन देर तक कायम
एक ही विमान के गुज़रने पर भी लकीर का रूप हर दिन अलग होता है। जिन दिनों ऊँचाई पर हवा सूखी होती है, बर्फ़ के कण जल्दी ही फिर जलवाष्प बन जाते हैं। इसलिए एक छोटी लकीर बनती है और कुछ ही मिनटों में गायब हो जाती है।
इसके उलट, जिन दिनों ऊँचाई पर हवा नम होती है, बर्फ़ के कण आसपास की जलवाष्प सोखकर और बड़े होते जाते हैं। तब लकीर कई घंटों तक बनी रहती है और हवा के साथ बहकर दूर तक फैलते हुए कभी-कभी ऐसा पतला बादल बन जाती है, जिसे पंख जैसे दिखने वाले पक्षाभ बादलों से अलग पहचानना मुश्किल होता है।
एक आम ग़लतफ़हमी
बहुत से लोग सफ़ेद लकीर को इंजन से निकला प्रदूषण वाला धुआँ समझते हैं। लेकिन सफ़ेद दिखाई देने वाला हिस्सा ज़्यादातर बर्फ़ होता है, इसलिए उसी विमान की लकीर सूखे आसमान में लगभग दिखाई नहीं देती। ज़मीन के पास मौसम साफ़ और सूखा हो, तब भी ऊँचाई पर हवा नम हो सकती है। इसलिए ज़मीन पर महसूस होने वाली नमी से यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि लकीर बनी रहेगी या नहीं।
इसलिए कॉन्ट्रेल को एक ऐसा संकेत समझ सकते हैं, जो बताता है कि “उस ऊँचाई पर हवा अभी नम है या नहीं।”
आसमान देखते समय काम की बात
जिस दिन कॉन्ट्रेल देर तक बनी रहती है और फैलती जाती है, उसका मतलब है कि ऊँचाई पर हवा में जलवाष्प अधिक है। बारिश के बादल लाने वाला कम दबाव का क्षेत्र पास आने पर ऐसा अक्सर होता है, इसलिए इसे एक-दो दिन में आसमान में बादल छाने के संकेत के तौर पर भी देखा जाता है। यह हमेशा सही नहीं होता, इसलिए मौसम के पूर्वानुमान के साथ इसे देखना अच्छा है।
हवाई अड्डे के पास उड़ान भरते या उतरते विमान के पंखों के सिरों पर थोड़ी देर के लिए दिखने वाली सफ़ेद लकीर कुछ अलग होती है। पंख के पास से गुज़रते समय हवा का दबाव कम होने से वह ठंडी पड़ती है और उसमें पानी की बूँदें बन जाती हैं। इसलिए नम दिनों में यह कम ऊँचाई पर बनती है और कुछ ही मीटर पीछे तुरंत गायब हो जाती है।
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कॉन्ट्रेल बर्फ़ का बादल है, जो इंजन से निकली जलवाष्प के ठंडे आसमान में जमने से बनता है। अगर यह जल्दी गायब हो जाए, तो उस दिन ऊँचाई पर हवा सूखी है; अगर देर तक बनी रहे और फैले, तो हवा नम है।
टिप्पणियाँ और संदर्भ · ब्रिटेन का मौसम विभाग Met Office, “Contrails”. इसमें बताया गया है कि इंजन से निकली जलवाष्प 6 हज़ार मीटर या उससे अधिक की ऊँचाई पर ठंडी हवा में जमकर कॉन्ट्रेल बनाती है। हवा सूखी हो तो यह गायब हो जाती है, और नम हो तो फैलकर देर तक बनी रहती है। मौसम के संकेत के रूप में यह केवल एक सहायक जानकारी है।
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