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अंक 95विज्ञान3 मिनटपठन 109

प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट

क्षितिज के पास दिखता पूर्णिमा का चाँद, क्या सचमुच बड़ा हो गया है?

क्षितिज के ऊपर दिखते बड़े चाँद की तस्वीर लें, तो वह आपकी उम्मीद से अलग दिखता है।

सूर्यास्त के समय पहाड़ी और छतों के ऊपर अभी-अभी उगा हुआ पूर्णिमा का बड़ा नारंगी चाँद

क्षितिज के पास नीचे दिखने वाला चाँद और आसमान में ऊँचाई पर दिखने वाला चाँद आकार में बराबर होते हैं। उसका बड़ा दिखना आँखों और मस्तिष्क से पैदा होने वाला दृष्टिभ्रम है, और तस्वीर लेकर मापने पर उसका व्यास लगभग उतना ही रहता है।

तस्वीर में मापें तो आकार बराबर मिलता है

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA सलाह देती है कि अभी-अभी उगे चाँद और ऊँचाई पर पहुँचे चाँद की तस्वीरें एक ही कैमरे से, एक ही आवर्धन पर लेकर तुलना करें। दोनों तस्वीरों में चाँद का क्षैतिज व्यास मापने पर बराबर मिलता है। नीचे दिखते चाँद की रोशनी को हवा मोड़ देती है, इसलिए तस्वीर में वह उलटे ऊपर और नीचे से थोड़ा दबा हुआ अंडाकार दिखता है। उसकी रोशनी हवा में लंबा रास्ता तय करके आती है, इसलिए उसमें नारंगी रंगत होती है।

दूरी भी हमारी सोच के उलट है। क्षितिज पर दिखने वाला चाँद हमारे सिर के ऊपर दिखने वाले चाँद की तुलना में हमसे लगभग 1.5% अधिक दूर होता है। यह बात भी अक्सर सुनने को मिलती है कि हवा आवर्धक काँच की तरह चाँद को बड़ा कर देती है, लेकिन NASA बताती है कि हवा उलटे चाँद को थोड़ा चपटा कर देती है।

मस्तिष्क आकार का फिर से अनुमान लगाता है

एक प्रचलित व्याख्या यह है कि यह पोंज़ो दृष्टिभ्रम जैसा है। दूर जाने के साथ संकरी होती दिखने वाली रेल की पटरियों पर बराबर लंबाई की दो छड़ियाँ रखें, तो दूर वाली छड़ी अधिक लंबी दिखती है। हम क्षितिज की ओर की जगह को अधिक दूर समझते हैं, लेकिन वहाँ चाँद छोटा नहीं दिखता, इसलिए मस्तिष्क उसे बहुत बड़ी वस्तु मान लेता है।

हालाँकि, NASA भी नहीं मानती कि इस व्याख्या से पूरी पहेली सुलझ गई है। इसकी वजह यह है कि अंतरिक्ष की कक्षा में भी, जहाँ इमारतों या पेड़ों जैसे संकेत नहीं होते, अंतरिक्ष यात्रियों को यही दृष्टिभ्रम होता है। हज़ारों साल से इसे देखा जाता रहा है, लेकिन अभी तक कोई ऐसा उत्तर नहीं है जिस पर सहमति हो।

एक नाखून से जाँचें

इसे अपने घर के सामने भी आसानी से जाँच सकते हैं। बाँह पूरी फैलाकर तर्जनी को चाँद के बगल में रखें, तो नाखून और चाँद लगभग बराबर आकार के दिखते हैं। चाँद नीचे हो या ऊँचाई पर, दोनों में यही होता है। कागज़ को लपेटकर बनाई गई नली से केवल चाँद को देखें, या कमर झुकाकर पैरों के बीच से उलटा देखें, तो भी चाँद पहले जितना बड़ा नहीं दिखता।

क्षितिज के पास के तारामंडल भी बड़े दिखते हैं। इसका मतलब है कि यह केवल चाँद के साथ नहीं होता, बल्कि आसमान के निचले हिस्से को देखते समय हमारा मस्तिष्क आकार को अलग तरह से समझता है।

तस्वीरों में दिखने वाला विशाल चाँद

तो फिर तस्वीरों में क्षितिज का चाँद इतना विशाल क्यों दिखता है? NASA बताती है कि ऐसी तस्वीरें आम तौर पर दूर की इमारतों या पहाड़ों को पृष्ठभूमि में रखकर टेलीफ़ोटो लेंस से ज़ूम करके ली जाती हैं। चाँद और पृष्ठभूमि दोनों बड़े हो जाते हैं, इसलिए चाँद पूरे दृश्य पर छाया हुआ दिखता है।

अगर आपने फ़ोन से बड़े चाँद की तस्वीर ली और उसमें वह छोटे बिंदु जैसा दिखने पर निराश हुए, तो समझिए कि चाँद को बड़ा दिखाने वाला फ़ोन नहीं, आपकी आँखें और मस्तिष्क थे। ऐसे में ज़ूम करके दूर की इमारतों या पहाड़ों को भी तस्वीर में शामिल करके देखें।

नीचे दिखते चाँद का वास्तविक आकार भी उतना ही होता है, और उसका बड़ा दिखना मस्तिष्क के दूरी का अनुमान लगाने के दौरान पैदा होने वाला दृष्टिभ्रम माना जाता है।

टिप्पणियाँ और संदर्भ · NASA Science·NASA(2025). NASA Science के “Photographing the Moon Illusion” और “The Moon Illusion”, तथा “We Asked a NASA Scientist” की कड़ी 50 (2025) का संदर्भ लिया गया है। यह दृष्टिभ्रम कैसे पैदा होता है, इस पर अभी तक कोई सर्वमान्य व्याख्या नहीं है।

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छोटी प्रश्नोत्तरी

क्षितिज के पास दिखने वाले चाँद की तस्वीर लेकर मापें, तो क्या पता चलेगा?

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