अंक 62दैनिक जीवन3 मिनटपठन 114
प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट
क्या ब्रेड एक ही दिन में सूखने की वजह से सख्त हो जाती है?
थैली अच्छी तरह बंद रखने पर भी ब्रेड कुछ दिनों बाद कड़ी हो जाती है। नमी के अलावा भी ब्रेड के भीतर कुछ बदलता है।
ब्रेड के सख्त होने में दो प्रक्रियाएँ एक साथ काम करती हैं। बाहर से नमी हवा में उड़ जाती है, और भीतर वह स्टार्च, जो बेक करते समय फूल गया था, समय बीतने पर फिर से सघन होकर सख्त हो जाता है। थैली सिर्फ पहली प्रक्रिया को रोकती है, जबकि दूसरी तापमान पर निर्भर करती है।
थैली किस चीज़ को रोकती है
प्लास्टिक की थैली अच्छी तरह बंद करने पर ब्रेड के आसपास की हवा जल्दी नम हो जाती है, जिससे उसकी नमी कम निकलती है। प्लेट में खुली रखी ब्रेड आधे दिन में ही किनारों से रूखी होने लगती है, जबकि थैली में रखी ब्रेड एक-दो दिन तक अपेक्षाकृत मुलायम रहती है। कागज़ की थैली से हवा आती-जाती रहती है, इसलिए उसमें यह असर बहुत कम होता है।
लेकिन ताज़ा बेक की हुई ब्रेड को गर्म रहते ही थैली में डालने पर अंदर भाप की बूँदें जम जाती हैं, जिससे उसकी बाहरी परत सील जाती है और फफूँद भी आसानी से लगती है। बेहतर है कि उसे इतना ठंडा होने दें कि हाथ से छूने पर हल्की गुनगुनी लगे, फिर थैली में रखें।
नमी बनी रहने पर भी ब्रेड सख्त होती है
अक्सर माना जाता है कि ब्रेड सूखने की वजह से सख्त होती है, लेकिन 1852 में फ़्रांसीसी रसायनशास्त्री बूसेंगो ने एक प्रयोग से इस धारणा को पलट दिया। उन्होंने नमी से भरे काँच के ढक्कन के नीचे गर्म ब्रेड का एक टुकड़ा रखा। चार दिनों में उसका वज़न लगभग नहीं घटा, फिर भी ब्रेड हर दिन और सख्त होती गई। इसके उलट, छह दिनों बाद पूरी तरह सख्त हो चुकी एक बड़ी ब्रेड को दोबारा ओवन में गर्म किया गया, तो वह ताज़ा बेक की हुई ब्रेड की तरह मुलायम हो गई। अगर वह सूखने की वजह से सख्त हुई होती, तो गर्म करने भर से पहले जैसी नहीं हो सकती थी।
जिसे थैली नहीं रोक सकती
ब्रेड बेक करते समय स्टार्च पानी सोखकर फूलता है और नरम हो जाता है। ठंडा होने के बाद यही स्टार्च धीरे-धीरे फिर से सघन होकर जुड़ने लगता है और अपने भीतर थामा हुआ पानी छोड़ देता है। इसलिए नमी ब्रेड के भीतर बनी रहने पर भी उसका अंदरूनी हिस्सा कड़ा हो जाता है। ठंडे चावल के सख्त होने में भी यही प्रक्रिया होती है। सख्त ब्रेड को टोस्टर में गर्म करने पर वह फिर से मुलायम इसलिए हो जाती है कि लगभग 60 डिग्री से ऊपर की गर्मी सघन होकर जुड़े स्टार्च को कुछ समय के लिए ढीला कर देती है। गर्म की हुई ब्रेड ठंडी होने पर जल्दी फिर से सख्त हो जाती है, इसलिए खाने से ठीक पहले गर्म करें।
फ्रिज से बेहतर फ्रीज़र
स्टार्च के फिर से सघन होकर जुड़ने की प्रक्रिया फ्रिज के तापमान पर सबसे तेज़ होती है। इसलिए ब्रेड को फ्रिज में रखने पर वह कमरे के तापमान पर रखी ब्रेड से भी जल्दी सख्त हो जाती है। फ्रीज़र जैसी बहुत ठंडी जगह में यह प्रक्रिया लगभग रुक जाती है, इसलिए जिस ब्रेड को दो दिन में पूरा न खा सकें, उसे थैली समेत जमा देना और फिर खाने भर की ब्रेड निकालकर गर्म करना बेहतर है। बंद थैली के भीतर नमी रहती है, इसलिए फफूँद भी आसानी से लगती है। इसीलिए ब्रेड को कमरे के तापमान पर कई दिनों तक न रखना बेहतर है।
संबंधित लेख
थैली सिर्फ नमी को उड़ने से रोकती है। भीतर का हिस्सा सख्त होना तापमान से जुड़ा है, इसलिए लंबे समय तक रखनी हो तो ब्रेड को फ्रिज की जगह फ्रीज़र में रखना बेहतर है।
टिप्पणियाँ और संदर्भ · Gray·BeMiller (2003) · बूसेंगो (1852) का ब्रेड के बासी होने पर प्रयोग. यह समीक्षा ब्रेड के सख्त होने का मुख्य कारण स्टार्च का दोबारा क्रिस्टल बनाना बताती है। यह प्रक्रिया फ्रिज के तापमान पर सबसे तेज़ होती है और जमा देने पर लगभग रुक जाती है। बूसेंगो ने दिखाया कि नमी निकलने से बचाकर रखी गई ब्रेड भी सख्त होती है और दोबारा गर्म करने पर मुलायम हो जाती है।
लेखन मानदंडत्रुटि की सूचना दें
छोटी प्रश्नोत्तरी