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अंक 120अर्थव्यवस्था4 मिनटपठन 77

प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट

क्या बड़ा पैक खरीदना वाकई सस्ता पड़ता है?

एक ही शहद की बड़ी और छोटी बोतलें साथ रखी हैं। कैसे जानें कि कौन-सी लेने में फायदा है?

लकड़ी की खाने की मेज़ पर साथ रखी एक ही शहद की बड़ी और छोटी काँच की बोतलें, खरीदारी की टोकरी और रसोई का तराज़ू

यह मान लेना आसान है कि बड़ा पैक या कई चीज़ों का एक साथ बिकने वाला पैक हमेशा सस्ता होता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि ऐसा हो। दक्षिण कोरिया के चार बड़े स्टोरों की कीमतों पर किए गए एक अध्ययन में लगभग हर चार में से एक मामले में बड़ी पैकिंग की कीमत समान मात्रा के हिसाब से उलटे ज़्यादा थी।

जब बड़ा पैक ज़्यादा महँगा हो

इस अध्ययन में चार बड़े स्टोरों में बिकने वाले 5,389 उत्पादों की कीमतें जुटाकर उनकी तुलना की गई। इनमें से 26%, यानी 1,403 उत्पादों में बड़े पैक या कई चीज़ों के संयुक्त पैक की प्रति इकाई कीमत छोटे उत्पाद से ज़्यादा थी। प्रति इकाई कीमत का मतलब है, 100 ग्राम या 100 मिलीलीटर जैसी समान मात्रा के हिसाब से निकाली गई कीमत। बड़ी पैकिंग का इस तरह महँगा पड़ना ‘मात्रा अधिभार’ कहलाता है।

अमेरिका और यूरोप में हुए ऐसे ही सर्वेक्षणों में भी यह अनुपात बहुत अलग नहीं था। यह सबसे अधिक मेवों और सूखे फलों में दिखा, जबकि डिटर्जेंट और सफाई के सामान में सबसे कम दिखा।

ऐसा क्यों होता है?

अध्ययन में दो स्थितियों में मात्रा अधिभार ज़्यादा देखने को मिला। जब दोनों उत्पादों की मात्रा में अंतर कम था, और जब उनकी मात्राओं की आपस में तुलना करना मुश्किल था। 450 ग्राम और 500 ग्राम की तरह अंतर कम हो, या एक पर ग्राम में और दूसरे पर नगों की संख्या में मात्रा लिखी हो, तो मन ही मन तुरंत भाग देकर हिसाब लगाना मुश्किल होता है।

छूट की पेशकश भी कीमतों का क्रम उलट देती है। अगर छूट केवल छोटे उत्पाद पर हो, तो वह सामान्य से सस्ता हो जाता है, जबकि बड़े उत्पाद की कीमत पहले जितनी ही रह सकती है। बड़ा वाला सस्ता होगा, यह सोचकर बिना जाँचे उठा लें, तो नुकसान हो जाता है।

एक आम गलतफहमी

यह सोचना आसान है कि प्रति इकाई कीमत कम हो तो हर हाल में फायदा है। लेकिन पूरा इस्तेमाल करने से पहले ही सामान खराब हो जाए या उसका स्वाद बदल जाए, तो बची हुई मात्रा पर खर्च हुआ पैसा बेकार गया। दूध जैसी जल्दी खराब होने वाली चीज़ हो या मेवों जैसी चीज़, जिन्हें लंबे समय तक रखने पर तेल की बासी गंध आने लगती है, पहले यह सोचना चाहिए कि आपके घर में उन्हें कितनी तेज़ी से खाया-पिया जाता है।

इसके उलट, टॉयलेट पेपर या डिटर्जेंट जैसी चीज़ें, जो आसानी से खराब नहीं होतीं और नियमित इस्तेमाल होती हैं, अगर बड़े पैक में प्रति इकाई भी सस्ती हों, तो उन्हें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीदने की ज़रूरत नहीं है। आखिरकार कोई चीज़ सस्ती पड़ेगी या महँगी, यह पैक का आकार नहीं, बल्कि कीमत का लेबल और उसे इस्तेमाल करने की रफ़्तार तय करते हैं।

कीमत के लेबल पर कैसे ढूँढ़ें

दक्षिण कोरिया में बड़े हाइपरमार्केट या बड़ी कंपनियों के सुपरमार्केट को तय श्रेणियों की चीज़ों पर प्रति इकाई कीमत भी लिखनी होती है। शहद के लिए प्रति 100 ग्राम, दूध के लिए प्रति 100 मिलीलीटर और स्नैक्स के लिए प्रति 10 ग्राम जैसे मानक तय हैं, इसलिए कीमत के लेबल के कोने में लिखे छोटे अंकों की तुलना भर करनी होती है।

जहाँ ऐसा विवरण न हो, वहाँ कीमत को मात्रा से भाग देकर देख सकते हैं। फ़ोन के कैलकुलेटर पर कुछ ही सेकंड में हिसाब हो जाता है। अगर दोनों उत्पादों की इकाइयाँ अलग हों, तो तुलना करने से पहले उन्हें एक ही इकाई में बदल लें।

बड़ा पैक हमेशा सस्ता नहीं होता। कीमत के लेबल पर प्रति इकाई कीमत की तुलना करें और यह भी सोचें कि पूरा इस्तेमाल होने से पहले सामान खराब तो नहीं हो जाएगा।

टिप्पणियाँ और संदर्भ · KCI शोधपत्र «क्या बड़े पैक वाले उत्पादों की प्रति इकाई कीमत हमेशा कम होती है?». दक्षिण कोरिया के 4 बड़े स्टोरों के 5,389 उत्पादों में से 26.0% में मात्रा अधिभार पाया गया। स्टोर और समय के अनुसार अनुपात बदल सकता है। प्रति इकाई कीमत दर्शाने के मानक दक्षिण कोरिया के व्यापार, उद्योग और ऊर्जा मंत्रालय के मूल्य प्रदर्शन व्यवस्था लागू करने संबंधी दिशानिर्देशों पर आधारित हैं।

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छोटी प्रश्नोत्तरी

अध्ययन में बड़े पैक वाले उत्पाद किन परिस्थितियों में खास तौर पर अधिक बार महँगे पाए गए?

केवल इसी ब्राउज़र में सहेजा जाता है।

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