अंक 22तकनीक3 मिनटपठन 71
प्रकाशक · जीके पुस्तकालय · परिशिष्ट
बिना छुए ही फ़ोन की स्क्रीन अपने आप चमक उठती है
बस कंबल के अंदर से खिड़की के पास आए, और छूने से पहले ही स्क्रीन ने प्रतिक्रिया दे दी।
कंबल के अँधेरे में जिस मोबाइल को देख रहे थे, उसे खिड़की के पास ले जाएँ तो स्क्रीन अपने आप उजली हो जाती है। आपने उसे छुआ भी नहीं, इसलिए लग सकता है कि कहीं खराबी तो नहीं है, लेकिन मोबाइल ने आसपास की रोशनी मापकर अपनी चमक खुद बदली है। स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में कहीं इस काम के लिए एक छोटा-सा पुर्जा छिपा होता है।
स्क्रीन के ऊपर की छोटी-सी आँख कमरे की रोशनी मापती है
ज़्यादातर मोबाइल में सामने वाले कैमरे के पास एक बहुत छोटा पुर्जा होता है, जिसे प्रकाश सेंसर कहते हैं। इसका काम लगातार यह मापना है कि इस समय कमरे में कितनी रोशनी है।
अँधेरी जगह पर यह स्क्रीन की चमक घटाकर आँखों में चकाचौंध कम करता है, और धूप वाली जगह पर चमक बढ़ाता है ताकि अक्षर दिखाई दें। उतनी ही चमक पर भी धूप में स्क्रीन धुँधली दिखती है, इसलिए आसपास की रोशनी के हिसाब से उसकी चमक बढ़ा दी जाती है। iPhone में इस सुविधा को ऑटो ब्राइटनेस कहते हैं, और Android फ़ोन में यह आम तौर पर ऑटो ब्राइटनेस या ब्राइटनेस ऑप्टिमाइज़ेशन के नाम से मिलती है। इसलिए स्क्रीन की चमक का अपने आप बदलना दरअसल उसके ठीक से काम करने का संकेत है।
यह आपके किए बदलाव को याद भी रखता है
अपने आप तय हुई चमक को आप हाथ से थोड़ा घटाएँ, तो कुछ मोबाइल उस चुनाव को याद रखते हैं और अगली बार वैसी ही रोशनी में स्क्रीन की चमक अपने आप कुछ कम रखते हैं। Android की अडैप्टिव ब्राइटनेस इसका जाना-पहचाना उदाहरण है। इसीलिए शुरू के कुछ दिनों में चमक कभी कम, कभी ज़्यादा होती है, फिर धीरे-धीरे आपकी पसंद के करीब आने लगती है।
अगर उँगली, मोटा केस या उखड़ी हुई स्क्रीन प्रोटेक्टर फ़िल्म सेंसर को ढक दे, तो वह गलती से कमरे को अँधेरा मान सकता है और स्क्रीन अचानक मंद हो सकती है। बिना वजह स्क्रीन मंद हो जाए, तो पहले उसके ऊपरी हिस्से को देखें। सुरंग या लिफ़्ट में प्रवेश करते समय स्क्रीन की चमक थोड़ी देर से बदलती है, क्योंकि हर क्षणिक छाया पर स्क्रीन झिलमिलाए नहीं, इसके लिए आम तौर पर थोड़ा इंतज़ार करके चमक बदली जाती है।
कुछ बातें जिनमें आसानी से भ्रम हो सकता है
ऑटो ब्राइटनेस, स्क्रीन का रंग पीला करने वाले नाइट मोड से अलग सुविधा है। एक चमक बदलती है, तो दूसरी रंग तापमान।
यह चिंता भी होती है कि ऑटो ब्राइटनेस चालू करने से बैटरी ज़्यादा खर्च होगी, लेकिन अँधेरी जगह पर यह चमक घटा देती है, इसलिए इसका असर बैटरी बचाने वाला अधिक होता है। दूसरी ओर, मोबाइल गर्म हो जाए तो गर्मी कम करने के लिए वह जानबूझकर स्क्रीन की चमक घटा भी सकता है। ऐसे में उसे कुछ देर छाँव में ठंडा होने दें।
ऑटो ब्राइटनेस बंद करनी हो, तो iPhone में सेटिंग्स के ऐक्सेसिबिलिटी भाग में डिस्प्ले और टेक्स्ट साइज़ के अंदर जाकर इसे बंद कर सकते हैं। Android में आम तौर पर यह विकल्प डिस्प्ले सेटिंग्स में मिलता है।
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स्क्रीन अपने आप इसलिए उजली होती है क्योंकि सामने का प्रकाश सेंसर आसपास की रोशनी मापकर उसकी चमक तय करता है।
टिप्पणियाँ और संदर्भ · Apple सहायता · Android सहायता. Apple सहायता: iPhone की ऑटो ब्राइटनेस आसपास की रोशनी मापने वाले सेंसर से स्क्रीन की चमक नियंत्रित करती है। डिवाइस बहुत गर्म हो जाए तो स्क्रीन मंद हो सकती है। Android सहायता: अडैप्टिव ब्राइटनेस आसपास के वातावरण और उपयोगकर्ता के किए बदलावों के आधार पर चमक तय करती है।
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